प्रश्नोत्तर P19-0196 · भाग 19
गुरु जी, संसार रूपी फल की दुकान में हम कहां फंसे हैं — क्या जो मिल रहा है उसे स्वीकार करना चाहिए?
खरीदोगे तो मूल्य दोगे, और मूल्य दे रहे हो तो अच्छा-बुरा देखना ही पड़ेगा। आप फल में नहीं फंसे हो, आप वहां फंसे हो जहां से माल (पैसा) ला रहे हो। महापुरुषों ने भी 56 प्रकार का भोजन किया। खाने-पीने में नहीं फंसे — पैसे में फंसे हो कि जो पैसा आया है वह ईमानदारी का है या बेईमानी का। माल नहीं होता तो भूख लगने पर कोई जो दे देता, लेकर निकल लेते, इच्छा भी नहीं रखते।
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वीडियो: ब्रह्म जीव और माया में क्या भेद है ? #yogijikasatsang #aadhyatmik_satsang #livesatsang #gyan · 2024-12-26