प्रश्नोत्तर P19-0147 · भाग 19
गुरु जी, दृष्टा बनने की बहुत सारी विधियां हैं (जैसे ओशो की)। आप दृष्टा होने के बारे में क्या कहते हो?
मेरा तो कहना है कि बस कुछ ना करने में आ जाओ। देखने वाला बनना — मतलब कोई सामने है तभी तो देख रहे हो; इसलिए देखने में नहीं, दिखने में आ जाओ। देखोगे तो एक प्रयास है, देखने में एक जोर है; दिखने में समर्पण है, कोई प्रयास नहीं — जैसा है वैसा दिख रहा है। देखने में कुछ बचा रह जाता है, दिखने में सब खत्म हो जाता है — दिखना आखिरी है। "दृष्टा ही दृश्य है" — यह भी पकड़ लिया तो फिर फंस गए; बस दिखने में आ जाओ, बात खत्म। तब खुद को ही पता चल जाएगा कि जिसे ढूंढ रहा था वह तो मैं ही हूं।
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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19