प्रश्नोत्तर P19-0138 · भाग 19
गुरु जी, जब आप बात कर रहे होते हैं, तब भी क्या आप निर्विचार अवस्था में होते हैं?
मैं तो एक बात कह चुका हूं — निर्विचार नहीं हुआ जा सकता, निर्विकार हुआ जा सकता है। जब कुछ करोगे और विचार ही नहीं रहेंगे तो करोगे कैसे? महात्माओं ने भी भूख का विचार आया तभी भोजन मांगा। बुद्ध ने शिष्य से कहा कि यह चौमासा वहां करूंगा और जमीन बताई — विचार आया तभी ना बताया। इसलिए बेमतलब निर्विचार होना मत चाहो, निर्विकार हो जाओ और उसके लिए काम करो। जब तक कुछ करना है, विचार आएगा; जब कुछ नहीं करना, तब बात खत्म।
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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19