प्रश्नोत्तर P19-0132 · भाग 19
गुरु जी, आपके गुरु कौन हैं? आपको दीक्षा कैसे मिली, और उन्होंने आपको सद्गुरु ढूंढने क्यों भेजा?
2011 में कृष्ण जन्माष्टमी को उदासीन बड़ा अखाड़ा के एक महंत जी से दीक्षा ली और नाम पड़ा गोविंदा दास। तीसरे दिन मैं रोया और उनके पीछे घूमता रहा कि दीक्षा क्यों दी, मुझे अनुभव कराओ। उन्होंने कहा जन्म-जन्म लगते हैं; मैंने कहा कोई तो जन्म आखिरी होगा, यही आखिरी है — मैं अबोध हूं, काम-क्रोध-मद-लोभ से भरा, भटका हुआ हूं, लेकिन खोजकर रहूंगा। तब उन्होंने कहा, तुझे जो चाहिए, जा सद्गुरु ढूंढ — गुरु ने हमें खुद छोड़ दिया। इसलिए मैं नाम नहीं बोलता; भस्म उतार दी, कंठी टूट गई तो पहनी नहीं; आश्रम में अब भी आना-जाना है। मुझे कोई बर्दाश्त नहीं कर पाता था, क्योंकि मैं सीधी बात करता हूं — अच्छा-बुरा लगने के लिए नहीं बोलता। अगर आपको अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है, तो मुझे भी अपनी बात अपने तरीके से रखने की स्वतंत्रता है। जीवन में तीन गुरु रहे — घर में ही एक चचेरे भाई, फिर एक ज्योतिष के गुरु, और एक संन्यास के गुरु — सब छूट ही गए, बचा मैं।
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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19