प्रश्नोत्तर P19-0095 · भाग 19
गुरु जी, क्या आत्मज्ञानी हमेशा परमानंद में रहता है? सांसारिक आनंद और आत्मज्ञान के आनंद में क्या अंतर है?
एक बार आनंद में हो गया तो हो गया, बात ही खत्म — वहां दुख-सुख कहां है, दुख का लेवल ही नहीं आता, क्योंकि कुछ नहीं चाहिए। उस आनंद के लिए शब्द ही नहीं हैं; कौन सा आधार दूं, किसी भी सुख से उसकी तुलना नहीं हो सकती, उसका कोई पैमाना नहीं। भोजन, संसाधन — ये सब सिर्फ जरूरत हैं। अपना जीवन देखूं तो तन पर बस कपड़ा है; ना कोई बैलेंस है, ना कोई आदमी। अगर शरीर काम करना बंद कर दे तो ऐसा कोई नहीं जो एक गिलास पानी दे या हाथ पकड़कर उठाए — और मुझे 1% भी फिक्र नहीं; उस तड़पने में भी मुस्कुराता रहूंगा, देखते हुए निकल जाऊंगा। भविष्य की रत्ती मात्र भी फिक्र नहीं — यही है वह आनंद। और ऐसा व्यक्ति किसी को अपना बनाने का प्रयास भी नहीं करता।
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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19