प्रश्नोत्तर P19-0054 · भाग 19
गुरु जी, मेरा फसना कैसे हुआ?
जब हम समझने लायक हुए तो जीना चाहते थे — दुनिया को समझूंगा और जीऊंगा। लेकिन जन्म देने वालों ने अंदर बीज डाल दिए: बड़ा बन, और समाज की वर्ण व्यवस्था में पैदा हुए — कुछ नीचे, कुछ ऊपर। बीच में लटका दिया। आगे होते तो साधक/सेवक बनके निकल जाते, नीचे होते तो भी निकल जाते; बीच में रखकर इतनी गहराई से डाला कि आज भी निकाल नहीं पा रहा — बड़ा बनने की इच्छा। बड़े को मान-सम्मान मिलता देखा तो बेईमानी चालू, मान की इच्छा, लालच, दिखावा, योग्यता से ज्यादा पाना। वर्ण व्यवस्था को गहराई से समझो तभी निकल पाओगे। योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा का त्याग करो; ज्यादा चाहिए तो परिश्रम करो, ईमानदारी से काम करो और सत्कर्म अपनाओ।
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