प्रश्नोत्तर P19-0012 · भाग 19
गुरु जी, आपने अपनों की कुटिया नर्मदा तट के इसी क्षेत्र में क्यों बनाई?
यहां के लोग बहुत सज्जन हैं। यह नर्मदा परिक्रमा मार्ग है — यहां महिला चाहे रात 2 बजे आ जाए, पीने वाला भी उसे सुरक्षित छोड़ देगा, हाथ जोड़कर एक तरफ हट जाएगा; अकेली लड़की भी "नर्मदे हर" बोलकर परिक्रमा में जाती है। कहीं भी रुक जाओ, घर वाला नाम-पता या आईडी नहीं पूछेगा, बस कोड वर्ड है "नर्मदे", खुद बाहर सोकर आपको अंदर सुलाएगा, भोजन कराएगा। मां की इतनी प्रबल कृपा, दया, करुणा, प्रेम है — और फिर लोग कहते हैं यह सिर्फ नदी है। इसलिए यहां कुटिया बनाई कि जब यह शरीर नहीं रहेगा, कुटिया रहेगी, और आने वाले साधकों को कभी परेशानी न हो — यहां कभी कमी नहीं पड़ेगी; प्रकृति ऐसी है कि कोई संसारी दृश्य-शब्द है ही नहीं, साधक अपनी साधना करे।
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वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29