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प्रश्नोत्तर P18-0154 · भाग 18

गुरु जी, क्या हमारी बेईमानी के लिए समाज जिम्मेदार नहीं है? समाज में शामिल होने के लिए कुछ बेईमानी धारण करनी ही पड़ती है।

नहीं, आप जिम्मेदार हो, समाज नहीं। सीधा बताओ — मात-पिता से लेकर किसी ने आपको बेईमानी सिखाई? हर व्यक्ति यही कहता है — ईमानदारी से पढ़ना, खेलना, काम करना; बेईमान भी अपने घर में ईमानदार नौकर चाहता है। कोई ऐसा व्यक्ति मिला जिसने मजबूर किया? दूसरे आपसे बेईमानी तभी करेंगे जब पक्का हो जाएगा कि आप बेईमान हो; ईमानदार रहोगे तो वे ईमानदारी से ही पेश आएंगे — ईमानदारी से भी समाज में शामिल हो सकते हैं, ईमानदारी से जीवन बहुत आराम से जिया जा सकता है। बेईमानी हम छुप-छुपकर, अपनी जरूरत की पूर्ति के लिए, योग्यता से ज्यादा पाने के लालच में करते हैं — योग्य हो तो बेईमानी की जरूरत ही नहीं, कर भी नहीं पाओगे। कहीं से "इनडायरेक्टली आया" — तो लिया क्यों? गटर का पानी सामने आए तो पी लोगे? गालियां भी किसी ने नहीं सिखाईं — जितनी सुनीं उससे ज्यादा आप पैदा कर लेते हो; अच्छाई भी सुनी, वह क्यों नहीं सीखी? समाज को दोष मत दो, अपनी गलती स्वीकार करो कि मैंने लालच में बेईमानी की, अब छोड़ना चाहता हूं — यह सच्चाई है। आध्यात्मिक चर्चा में बैठे हो तो उस लेवल पर, आधार के साथ बोलो।

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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22