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प्रश्नोत्तर P18-0126 · भाग 18

गुरु जी, आपने अपने गुरु से पूछा था कि 41 दिन में क्या मैं जीवित भी रहूंगा — तो क्या उन महाराज जी को भी आपसे यही पूछना चाहिए था? क्या कोई आत्मज्ञान का समय दे सकता है?

हां, उन्हें पूछना चाहिए था; हमने तो साफ कहा था कुछ भी हो सकता है। वे खुद बोले थे कि आत्मज्ञान के लिए मर सकता हूं — और मुझे आत्मज्ञान जीते-जी चाहिए था, समझ भी चाहिए। वे बस आवेश में बोल रहे थे; वह संयोग उनके लिए निकल गया था। अब कोई बोले तो मैं नहीं बोल सकता — आत्मज्ञान कोई किसी को करवा नहीं सकता। रास्ता बता सकते हैं, पर कोई समय नहीं दे सकता कि कितने दिन में होगा। मुझे तो अपने जीवन की घटनाओं से पहले से मालूम था कि आत्मज्ञान हो जाएगा — मैं पक्का करके निकला था; मैंने संशय में कभी यात्रा ही नहीं की। संशय है तो आगे क्यों जाना, समय बर्बाद क्यों करना। (41 दिन बेमतलब पागल की तरह बैठूं और फिर कहा जाए तूने मन से नहीं बैठा — इसलिए पहले ही पूछ लिया था।)

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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22