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प्रश्नोत्तर P18-0118 · भाग 18

गुरु जी, कभी-कभी छोटा बड़े को समझाए तो बड़े को छोटे की बात समझ नहीं आती — तो छोटा होकर बड़े को कैसे समझाएं?

आप समझाओ मत, अपनी बात रख दो। एक घटना — मैं गुजरात में फटे कपड़ों में एक आश्रम गया; महाराज जी गद्दी पर बैठकर सत्संग कर रहे थे, पर उस गद्दी के लायक नहीं थे। उन्होंने कहा "स्वर सत्य है" और सबने हां में हां मिला दी। मैंने हाथ जोड़कर पूछा — महाराज जी, स्वर सत्य है कि स्वर लेने वाला? दोनों एक हैं या अलग? अंत में उन्होंने कहा, स्वर लेने वाला सत्य है। मैं यह भी कह सकता था कि आप गलत बोल रहे हैं, सिद्ध कर देते, लेकिन जिस गद्दी पर वे बैठे थे उसका भी एक सम्मान था — तो पूछ के बताया, उनको भी समझा दिया, भक्तों को भी। (अगले दिन उन्होंने कहलवा दिया कि मैं बीमार हूं।) बताने का भी एक तरीका होता है — बड़े को समझाओ तो छोटा बनकर समझाओ, बड़ा बनकर क्यों?

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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22