आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P18-0115 · भाग 18

गुरु जी, यह जांचने के लिए कि मैं किस भाव से जा रहा हूं, बहुत गहराई में उतरना पड़ता है और कुछ समय बाद दिमाग की क्षमता खत्म हो जाती है — तो कैसे पता करें?

जब आप निकलोगे तो पता रहेगा कि मैं किस कमी से निकल रहा हूं या किसलिए निकल रहा हूं — उस समय जांचना भी नहीं पड़ेगा। और वह कभी भूल भी नहीं पाओगे — जैसे व्यक्ति को कहां-कहां रहा याद हो या न हो, जन्मभूमि नहीं भूलता। आप दुकान पर जाते हो तो पता है किस लिए जा रहे हो; आगे तभी बढ़ो जब पता हो कहां और किस लिए जाना है। कभी भी अभाव-कुभाव में मत निकलना; उस अभाव-कुभाव को दूर करना और फिर संपन्न होकर निकलना। जीत के आगे बढ़ना, हार के नहीं — हार के बढ़े तो सारी जिंदगी जीतने पर लगोगे, और शेर को सवा शेर मिलता ही है।

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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22