प्रश्नोत्तर P18-0113 · भाग 18
गुरु जी, काम में (बॉस या गुरु के रोल में) कई बार ईगो धारण करनी पड़ती है; सालों तक धारण करते-करते वह स्वभाव बन जाती है। रोल भी निभाना है और वह स्वभाव भी न बने — यह कैसे करें?
पहले उन्हें काम में डांटें, और जब काम हो जाए तो उनके पास बैठकर बालक की तरह प्यार से समझाएं — कि इसमें तुम्हारा हित होगा, मैं नहीं चाहता तुम्हारा अहित हो, मैं चाहता हूं तुम आगे बढ़ो, उन्नति करो; अगर तुम गलती करोगे तो मैं बर्दाश्त नहीं करूंगा, क्योंकि मैं तुम्हें ऊपर उठते देखना चाहता हूं, नीचे नहीं। फिर वे आपकी डांट पर मुस्कुराएंगे, और उनके अंदर आपके प्रति कुछ होगा तो वह निकल जाएगा। इससे वह ईगो आपके स्वभाव का भाग नहीं बनेगी और आप पर हावी नहीं होगी।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22