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प्रश्नोत्तर P18-0098 · भाग 18

गुरु जी, आत्मा, जीव और कर्म का संबंध कैसे है?

आत्मा इस पिंड में आई — उसे भी इस दुनिया को देखना और समझना था, और इसके लिए पांच तत्व का शरीर चाहिए था। शरीर स्वयं चेतन है — चेतन ही चेतन को चेतन करता है, मुर्दे से बच्चे पैदा नहीं होते; कोई अंग कट जाए तो कुछ देर उसमें हरकत रहती है। फिर "मेरा" और मान के चक्कर में आकर वह जीवात्मा हो गई — जैसे पानी फ्रिज में गया तो कुछ समय बाद बर्फ हो गया। कर्म पहले जरूरत में हुआ, बाद में लालच में आकर कर्ता का भाव बन गया। बस ऐसे ही संबंध बनता गया — पहले जरूरत में, फिर इच्छा-अपेक्षा में।

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वीडियो: आत्मज्ञान किस स्थिति में होता है ? #aadhyatmik_satsang #livesatsang #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2025-01-03