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प्रश्नोत्तर P18-0041 · भाग 18

गुरु जी, सत्यता और ईमानदारी पर बात तो सब बहुत करते हैं, पर यह बहुत कठिन डगर लगती है — और आसान भी। ऐसा क्यों?

जब आपको अपने तरीके से चाहिए, तब कठिन है; और अपने तरीके से छोड़ दिया तो कुछ करना ही नहीं है। बस भाव का खेल है — "भावे विद्यते देवा", भाव में ईश्वर का वास है।

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वीडियो: योगीजी की आत्मकथा अज्ञान से ज्ञान तक खोज में कुछ अनुभव की बातें ! #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2024-08-25