प्रश्नोत्तर P18-0022 · भाग 18
गुरु जी, जीव और ब्रह्म के बीच जो झीना पर्दा है — वह तो उन्हीं के द्वारा रचित है, हमारा नहीं?
वह पर्दा आपने लगाया है — इच्छा-अपेक्षा का पर्दा; वह उसका नहीं। अगर उसका होता तो हम कभी उठा भी नहीं सकते। हम अबोध थे नहीं, अबोध बनते गए — कामनाओं, इच्छाओं, अपेक्षाओं, वासनाओं, अपने तरीके और उम्मीद में गिरते गए; कर्म की वजह से अबोधता धारण कर ली, और वह बच्चों वाली अबोधता नहीं, चालाकी वाली हो गई। अगर पर्दा उसका होता तो इतनी व्याकुलता के बाद कब का उठा देता — और सबके लिए उठा देता; कौन मां-बाप चाहेगा कि वह अपने बच्चों से न मिले? पर्दा आपने लगाया है, आपको ही उठाना पड़ेगा — यह पर्दा मात्र इच्छा-अपेक्षा, कामना, मान और सम्मान का है।
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वीडियो: योगीजी की आत्मकथा अज्ञान से ज्ञान तक खोज में कुछ अनुभव की बातें ! #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2024-08-25