प्रश्नोत्तर P18-0005 · भाग 18
गुरु जी, आज कई जगह फीस भरकर 10 दिन में आत्मज्ञान या ध्यान कराने की बात होती है — इसे कैसे देखें?
आध्यात्मिक मंडियां खुल गई हैं; ध्यान, योग, ज्ञान, भक्ति सब बेचा जा रहा है। मैं भी अज्ञानता में ऐसी एक मंडी में गया था कि 10 दिन में आत्मज्ञान हो जाएगा — वहां जाकर बहुत रोया। झूठ का पता चल गया, पर सच का पता नहीं था, इसलिए किसी को सिद्ध नहीं कर सकता था; तब तय किया कि अब इस पर काम करूंगा और मेरे काम से ही पता चलेगा कि सच क्या है। ध्यान कभी बेचा-खरीदा जा ही नहीं सकता — ध्यान तो अपने आप घटित होता है; बस आपको देखना है कि आप कहां फंसे हो। आखिर में ध्यान, ज्ञान, भक्ति, योग सब छूट जाएगा और बचूंगा मैं — जो सत्य है, और सत्य ब्रह्म तक ले जाएगा। लौकिक चीजों में धोखा पाप है, पर पैसे के लिए परमात्मा के नाम से आत्मा को भटकाना महापाप है — यह ड्रग्स बेचने से भी ज्यादा खतरनाक है। गेरुआ वस्त्र के लिए महापुरुषों ने बलिदान दिया है; उसे पहनकर भीख मांगना, उसे धंधा बनाना शर्म की बात है।
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वीडियो: योगीजी की आत्मकथा अज्ञान से ज्ञान तक खोज में कुछ अनुभव की बातें ! #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2024-08-25