प्रश्नोत्तर P18-0002 · भाग 18
गुरु जी, आज लोग खुलकर कहते हैं कि बेईमानी के बिना चलेगा ही नहीं — बच्चों को अच्छी शिक्षा देनी है तो बेईमानी करनी पड़ेगी। क्या सच में जीवन जीने के लिए बेईमानी जरूरी है?
आज स्वतंत्रता दिवस है — हम बाहर के लोगों से तो आजाद हो गए, पर क्या सच में आजाद हैं? पहले हम बाहर से जकड़े हुए थे, अब अंदर से अपने आप को बेईमानी की इतनी कठोर जंजीर में बांध रहे हैं और कहते हैं बेईमानी बिना चलेगा ही नहीं। एक अच्छा कमाने वाले ने कहा, बेईमानी नहीं करेंगे तो बच्चों को शिक्षा कैसे देंगे — पर उस पैसे में ही गुण-अवगुण आ गया। उस पैसे से शिक्षा तो होगी, पर संस्कार नहीं रहेगा; वह जरूर बुराई की तरफ ही ले जाएगा। मुझे तो जरा सा भी नहीं लगता कि जीवन जीने के लिए बेईमानी की जरूरत है। इसीलिए आज व्यवस्थाएं बहुत हो गईं और जीवन अशांत हो गया — हम शरीर से पास हैं पर मन से एक-दूसरे से बहुत दूर हो गए।
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