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प्रश्नोत्तर P17-0163 · भाग 17

गुरु जी, "मैं ही तुम हूं और तुम ही मैं हो" — क्या हम सभी एक ही प्राण हैं?

नहीं — न तुम हो, न मैं हूं। तुम हो तो मैं हूं; तुम नहीं तो फिर "मैं" बोलने की भी जरूरत नहीं। तुम्हारे द्वारा ही मैं हूं, तुम्हें छोड़ दिया तो फिर मैं भी खत्म।

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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21