आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P17-0153 · भाग 17

गुरु जी, हमसे वैसी तत्परता और तीव्रता क्यों नहीं बनती? अगर अभी भी मौका मिले तो मन कुछ बदलना ही चाहता है।

ऐसा ही है — अभी भी अगर ऐसी ताकत मिल जाए कि जो चाहो वो हो जाए, तो आप वहीं भागोगे: पिछला तरीका काम नहीं किया, नए तरीके से करके देखते हैं; झंडा मेरा लहराए, मूर्तियां मेरी बनें, आत्मज्ञान तो अंदर है, कभी भी कर लेंगे। आप अनेक उपाय करके, हार-थककर, अपमान और धोखा पाकर अब मजबूर होकर भाग रहे हो — इसलिए तीव्रता नहीं है, सारे चांस ले चुके हो। काम नहीं हो रहा तो उसे त्याग का नाम दे रहे हो — युद्ध की रणनीति फेल हो गई तो कहते हो अब शांति करो। जब यह पता चलेगा कि यह युद्ध कभी जीता ही नहीं जा सकता, क्योंकि यह भवसागर है, इसका आदि-अंत नहीं, अलग-अलग शरीर रूपी कपड़े बदलकर आज तक लड़ ही रहे हो और नए-नए योद्धा आते जा रहे हैं — तब असली बात समझ आएगी।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21