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प्रश्नोत्तर P17-0142 · भाग 17

गुरु जी, यहां बातचीत की मनाही क्यों है, और "मेरा" कहने में क्या गड़बड़ है?

बातचीत में ही तो लीला है। "मेरा पेड़" — जब तक किसी को बताओगे नहीं, तब तक वो तुम्हारा बन नहीं पाएगा; "मेरा" कहने से अहम भाव खड़ा होता है, और मेरा बताने के लिए कोई दूसरा चाहिए। अगर आपको राजा बना दिया जाए पर कहा जाए कि यह गुप्त रहेगा, किसी को पता नहीं चलेगा — छप्पन भोग, सारी व्यवस्था, बस पद न बताया जाए — तो आप बौखला जाओगे। यह रहस्य है कि तुम अपने लिए कुछ बनते ही नहीं, सारा नाटक लोगों के लिए है — पेड़ के द्वारा तुम अपने आप को खड़ा करना, किसी को दबाना चाहते हो। अपने लिए तो बस उतना खाना है जितने में जी सकते हो; अकेले बनाकर खाना हो तो छप्पन भोग से शुरू करके साग-रोटी, फिर बासी पर आ जाओगे। व्यवस्थाएं भीड़ के लिए चाहिए, अहम भाव को पोषण देने के लिए।

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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21