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प्रश्नोत्तर P17-0118 · भाग 17

गुरु जी, प्रेम का क्या स्थान है? राधा जी और उद्धव जी के प्रसंग से क्या समझें?

राधा जी और कृष्ण जी के बीच ना कोई भक्ति थी ना कोई ज्ञान — बीच में कुछ नहीं था, बस प्रेम था। कृष्ण के जाने पर उद्धव जी राधा जी को ज्ञान सिखाने गए थे, और सारा पोथी-पत्रा नदी में बहाकर चले आए। मूल को पकड़िए — जिनके दर्शन के लिए लोग तरसते हैं, उनसे राधा जी सीधा बात करती थीं, क्योंकि उनमें प्रेम था; वे प्रेम में भक्ति, ज्ञान सब कुछ डुबा देती थीं — प्रेम के अंदर सब निमित्त बनते हैं। उद्धव जी भी साधारण नहीं थे, रटे-रटाए ज्ञानी नहीं, परम ज्ञानी थे; उनमें भी प्रेम था तभी प्रेम को समझ पाए — ज्ञान समझाने गए और प्रेम समझकर लौट आए, देखा कि दोनों का प्रेम एक ही है। प्रेम घटित होगा तभी आनंद घटित होगा, आनंद घटित होगा तभी आत्मज्ञान होगा, उसके पहले हो ही नहीं सकता।

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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21