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प्रश्नोत्तर P17-0089 · भाग 17

गुरु जी, साधु भी बन जाते हैं तो उन्हें भी आनंद तो चाहिए — "चाहिए" तो हट ही नहीं रहा। कुछ नहीं चाहिए, तो आनंद क्यों चाहिए?

कुछ नहीं चाहिए में जो होगा वह मिलेगा। आनंद भी चाहिए, तो आपके तरीके वाला, आपकी पसंद और चाहने के हिसाब से आनंद मिल जाएगा — वह आनंद और वो आनंद अलग है। एक सीमित आनंद है, एक असीमित। कुछ चाहिए — चाहे आनंद ही क्यों ना चाहिए — तो अपने दायरे में सीमित आनंद मिलेगा; और जब कुछ नहीं चाहिए, आनंद भी नहीं, तब असीमित आनंद मिलेगा।

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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21