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प्रश्नोत्तर P17-0075 · भाग 17

गुरु जी, गीता कहती है जो दिख रहा है सब भ्रम है — तो फिर हम इस भ्रम में फंसे क्यों हैं, और यह भ्रम कैसे टूटेगा?

एक कागज पर चित्र है, आप उसे जला दीजिए — राख हो गया तो चित्र गया; लेकिन वह पहले भी नहीं था और बाद में भी नहीं रहेगा, यही बात समझनी है। हम तत्व में नहीं, रूप में फंसे हैं, इसलिए जो दिख रहा है वह भ्रम है — लेकिन इस भ्रम में हम भी तो फंसे हैं। रस्सी देखकर सर्प का भय हुआ, मतलब सर्प के बारे में उसे गहरी जानकारी दी गई है; जब तक वह खुद रस्सी तक जाएगा नहीं, उसका भ्रम नहीं टूटेगा — किसी और के जाने से नहीं टूटेगा। मैं लिप्त हुआ हूं तो उसकी कोई वजह है। पूरी जिंदगी भोग-भोजन से सुख लिया, सबसे ज्यादा समय उसी में दिया, और आज कह दो "भ्रम है, ब्रह्म है" — ऐसे नहीं चलेगा।

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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21