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प्रश्नोत्तर P17-0071 · भाग 17

गुरु जी, आखिरी गुरु कौन है, और हम रूप और ब्रांड में क्यों फंस जाते हैं?

नल नहीं मिले तो आखिरी में प्रकृति है — नदियों में पहुंच जाओ, वहां कोई रोकने वाला नहीं, शुद्ध जल है। आखिरी गुरु प्रकृति है, लेकिन शुरुआत में नहीं, जब खोजते-खोजते खोजने को कुछ नहीं बचेगा तब। प्रकृति कल्पवृक्ष की तरह है — जैसे-जैसे आप योग्य होते हो, जो चाहिए वह वस्तु या जीव आपके पास आने लगता है, बस रूप बदलता रहता है। हम रूप में फंस गए हैं — जरूरत नहीं देखते, ब्रांड देखते हैं; अब तो आदमी भी ब्रांडेड चाहिए: "ज्ञान बाद में देखेंगे, बताओ कितने लाखों अनुयायी हैं"। हर रूप के पीछे तत्व वही है — रोटी, पराठा, पूड़ी, पीछे वही है; रोज पराठा खाओगे तो बीमार हो जाओगे, रोज रोटी ही चलेगी। फंसाए आप हो, तो फंसाने की ताकत थी मतलब निकालने की ताकत भी है — समझकर कैसे भी अपने आप को निकालो।

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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21