प्रश्नोत्तर P17-0054 · भाग 17
गुरु जी, जो हमारी इंद्रियों के जरिए अनुभव अंदर जा रहा है, वो चित्त में स्टोर होता है — अचेतन मन — और सोते समय या कुछ भी करते समय वहां से चीजें निकल-निकलकर सामने आती हैं, दिमाग में घूमती रहती हैं। इसका क्या करें?
अंदर कुछ भी नहीं है, लेकिन सब अनुभव अंदर से ही आते हैं — अनुभव करने वाला अंदर है, लेकिन अनुभव बाहर से आया है; स्वाद लेने वाला अंदर है, स्वाद बाहर से आया है। अंदर कोई अनुभव नहीं। शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श — पांच इंद्रियों द्वारा जानकारी इकट्ठी होती है; मन का काम है आपको बताते रहना। बाहर से लेना बंद होगा तो वो अंदर से निकालने लगेगा — बस अपने आप को उसकी सफाई में लगा दो। उसका काम है आपको इंगित करना।
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वीडियो: आत्मज्ञानी और ब्रह्मज्ञानी में क्या भेद है | मन क्या है / #आत्मज्ञानी #ब्रह्मज्ञानी #aadhyatmik · 2024-09-04