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प्रश्नोत्तर P17-0044 · भाग 17

गुरु जी, जो इस जीव वाली स्टेज से ऊपर उठ जाता है — जो भ्रम में नहीं है, कामनाओं से हट गया — उसको अगर दिक्कत आए, उसका हाथ कट जाए, तो दर्द किसको होगा?

शरीर के दर्द को महसूस करेगा, क्योंकि शरीर चेतन है — दर्द होगा, लेकिन उसे समझ में आ जाएगा कि ये मेरा दर्द नहीं, शरीर का दर्द है। ऐसा नहीं कि इलाज नहीं कराएगा — इस शरीर का उपयोग करना है तो कराएगा, नहीं तो जरूरत क्या है, छोड़ भी देगा। अज्ञानता में दर्द सहा नहीं जाता; ज्ञान में कितना भी कष्ट हो, एकदम सह लेता है — आंख से आंसू भी आएं तो उसे भी वो देखेगा। अभी इंद्रियां हमें चलाती हैं — असल में इंद्रियां नहीं, कामनाएं हमें चला रही हैं; कामनाएं छोड़ दो तो इंद्रियां आपके वश में आ जाएंगी, आप उनके मालिक हो जाओगे। इसमें इंद्रियों का दोष नहीं, दोष आपका है — सबके मूल में आप हो: कामनाओं में हो तो जीव, कामनाओं से मुक्त हो गए तो आत्मा। जैसे मोबाइल में सिम है — सिम को तोड़ दो, जला दो, पर नंबर का कुछ नहीं होता; आईडी दिखाओ तो वही नंबर नई सिम में आ जाता है। ऐसे आत्मा का कोई कुछ नहीं कर सकता; जब भी नाश होगा, जीव का होगा।

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वीडियो: आत्मज्ञानी और ब्रह्मज्ञानी में क्या भेद है | मन क्या है / #आत्मज्ञानी #ब्रह्मज्ञानी #aadhyatmik · 2024-09-04