आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P17-0039 · भाग 17

गुरु जी, मुझे आप जैसी मस्ती चाहिए।

"कुछ नहीं चाहिए" में आ जाओ — बस, मस्ती ही मस्ती। कुछ नहीं चाहिए तो मस्त है ना। अपनी लकीर को मिटा दो, हो जाओ फकीर — ना आगे, ना पीछे — हो गई मस्ती।

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वीडियो: आत्मज्ञानी और ब्रह्मज्ञानी में क्या भेद है | मन क्या है / #आत्मज्ञानी #ब्रह्मज्ञानी #aadhyatmik · 2024-09-04