प्रश्नोत्तर P17-0018 · भाग 17
योगी जी, कुछ लोग कहते हैं "मुझे कुछ नहीं चाहिए", अपने आप को ईमानदार भी कहते हैं, आपकी वीडियो देखना भी बंद नहीं करते — लेकिन आप जो स्पष्ट कहते हैं कि लाभ ले रहे हो तो कार्य में सहयोग करो, वो नहीं करते। इसे उनका भोलापन कहें या चालाकी?
इसको भोलापन नहीं कहेंगे। वो अपने आप को बहुत शातिर समझता है, चालाक है — लाभ भी ले रहा है और कह रहा है मुझे कुछ चाहिए भी नहीं। मैं तो खुल के कहता हूं कि भाई, अगर सत्संग के द्वारा आपके जीवन में बदलाव हो रहा है, तो उस व्यक्ति के कार्य में तो सहयोग करो — उसे आप व्यक्तिगत कुछ नहीं दे पा रहे हो, तो कम से कम उसके काम में तो, जिस लायक आप हो। अगर नहीं कर रहे हो तो यही तो आपकी बेईमानी है। (और जिसने मेरे काम का उपयोग नहीं किया, उससे तो कोई डिमांड ही नहीं।) कार्य को फैलाएंगे तो उसमें अर्थ तो लगेगा; तो आप अर्थ को सत्कर्म में लगाओ ना, जहां से आपको लाभ मिल रहा है। सत्कर्म तो आपको करना ही पड़ेगा — ईमानदारी, सत्कर्म।
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वीडियो: आखिर तेरा क्या होगा ? #योगी · 2026-01-11