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प्रश्नोत्तर P16-0193 · भाग 16

(लाइव) गुरुजी, क्या आत्मा हमारे शरीर के अंदर उपस्थित है, या यह सिर्फ बताने के लिए कहा जाता है?

देखो, आत्मा मैं ही हूं, कोई आत्मा हमसे अलग नहीं है। काहे को आत्मा के चक्कर में पड़ना? अपने चक्कर में पड़ो ना — मेरी स्थिति क्या है, मेरा जीवन शांति से परम शांति तक, परम आनंद तक कैसे जाएगा, उसके लिए मैं काम करूं या आत्मा के चक्कर में पड़ूं? आत्मा मैं ही तो हूं, और कौन है। मैं तो हूं ही, प्रत्यक्ष हूं — अपनी खोज मैं क्यों करूं? खोज ही गलत कर रहे हैं। कोई व्यक्ति आपसे पूछे, "भाई, मुझे पता बता दो" — "किसका?" — "मेरा", तो आप क्या कहोगे? पागल, तुम अपना पता लोगों से जाके पूछ रहे हो! किसी और का पूछे तो आप उसकी सहायता करोगे — फोटो दिखा या पता बता; दोनों नहीं है तो? तुम्हारा हाल यह है — परमात्मा को ढूंढ रहे हो, परमात्मा का पता नहीं; और उससे थोड़ा नीचे उतरे तो कहते हैं मैं खुद को ढूंढ रहा हूं। जरा सोचो — खुद को खुद ही ढूंढ रहे हो, कैसे मिलोगे? और इसमें लोग आपको सपोर्ट कर रहे हैं — "मैं तुम्हें ढूंढने में तुम्हारी मदद करूंगा" — और वो आपको लूट लेते हैं, और जिंदगी भर लुटते रहोगे। लूटने वाले भी बैठे हैं, लुटाने वाले भी। समझदार भी बता रहे, बुद्धिमान भी — मेरा पता मुझे बताओ, मैं कौन हूं। सबको पता है कि मैं कौन हूं, फिर भी पूछ रहे हैं। कहां लाके हमने अपने आप को खड़ा कर दिया, सोचो।

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वीडियो: अब जाऊं कहां / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-02-16