प्रश्नोत्तर P16-0120 · भाग 16
अब जैसे हम फिर भी लौट के जा रहे हैं — ये हमारी इच्छा-कामना है या हिसाब-किताब है? इसको हम समता में कैसे लें?
ये आप देखिए कि आप किस लिए जा रहे हो — इच्छा-कामना में जा रहे हो या कोई हिसाब-किताब है, उसका पता लगाना है। मैं गया किसलिए — उनके लिए कि अपने लिए? उसमें भी दोनों देखना है समता से। अपने लिए गया या उनके लिए — ये भाव का पता आपको ही है। कहीं बनावटी भाव तो नहीं था कि उनके लिए जा रहा हूं और अंदर से अपने लिए जा रहा हूं? ये आप ही पकड़ सकते हो, ये बहुत सूक्ष्म है। और अगर उनके लिए गया था तो क्यों गया था — वो भी पकड़ना होगा। बहुत सूक्ष्म यात्रा है ये; तभी आने-जाने वाला चक्कर बंद होगा। यहां जो आना-जाना दिख रहा है, ऐसे ही तो हम पता नहीं कितने शरीर धारण कर रहे हैं — बस शरीर बदल रहा है, कामना में वही सिस्टम पूरा चला हुआ है। इसको सूक्ष्मता से देखना है — क्या सच में उनके लिए जा रहा हूं, या इसमें मेरी एक परसेंट भी इच्छा है? जीव की इच्छा भोग और भोजन। एक घटना सुनाता हूं — चंदौली जिले में, बनारस के आगे, मैं गाड़ी लेकर आ रहा था, ट्रैफिक में गाड़ी रोकी तो एक ट्रक वाले ने पीछे से ठोक दी, पूरी डिग्गी टूट गई। हमारे साथी ने उतर के उसका कॉलर पकड़ लिया; मैंने तुरंत छुड़ाया, भीड़ को हटाया, कहा कोई बात नहीं, गाड़ी टूट गई तो बन जाएगी, किसी को कुछ हुआ नहीं। फिर उसे शांत होने का समय दिया और कहा — अंतरात्मा से सोच समझ के बोल, अगर एक परसेंट भी मेरी गलती है तो मैं गाड़ी उठा के चला जाऊंगा। उसने समय लेकर कहा कि बाबा, एक परसेंट भी आपकी गलती नहीं है। तो मैंने कहा, अब दो रास्ते हैं — या गाड़ी बनवा दे, या पैसे दे दे। किसी की सरलता को किसी की मजबूरी ना समझ — मैं सरल हूं लेकिन मजबूर नहीं। वह पैसा लेकर आया, तो मैंने कहा, बचा तो कुत्तों को खिला दूंगा, कम पड़ा तो मैं लगा दूंगा। जाते-जाते वो बोला, इतने सालों से गाड़ी चला रहा हूं, जिंदगी में पहली बार ऐसा आदमी मिला कि ठोकने के बाद भी बचा लिया। ये घटना इसलिए सुनाई कि बहुत सूक्ष्म यात्रा है, सोच समझ के जांचना। हमें ऐसा लगता है कि मैं लोगों के लिए जी रहा हूं — लोगों के लिए जीना इतना आसान ना समझना। बातें करना बहुत आसान है कि मैं तो आपके लिए आया हूं। यहां आप और तुम के लिए कोई नहीं आता, सब अपने मतलब में घूम रहे हैं। अगर मतलब खत्म हो जाए तो घूमना खत्म हो जाए — जिस दिन मतलब खत्म, उस दिन तुम खत्म।
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वीडियो: आखिर परमात्मा है तो हम उससे मिल क्यों नहीं पा रहे हैं ? #yogijikasatsang #aadhyatmik_satsang · 2024-10-12