आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P16-0009 · भाग 16

गुरु जी, "दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करे ना कोय; जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय" — वह सुख, वह सुमिरन क्या है?

निर्विकार होने का — क्योंकि वहां ना सुख है, ना दुख है।

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वीडियो: कोई प्रश्न ना होने के बाद कौन सा प्रश्न होना चाहिए ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-16