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प्रश्नोत्तर P15-0187 · भाग 15

गुरुदेव, अब तो कमर अकड़ गई, बैठा भी नहीं जाएगा — यह शरीर बोल रहा है कि मन? और जैसे अभी इतने प्रश्न चल रहे थे, मुझे बाथरूम आ रही थी, मन बोल रहा था कि बाथरूम करके आओ, पर अंदर से आवाज आई कि नहीं, प्रश्नोत्तर चल रहे हैं, ये जरूरी है।

यही तो बात है। कुछ देर पहले शरीर नहीं बोल रहा था, अब बोल रहा है — दर्द हो रहा है, वही शरीर की जरूरत है; मन की कोई इच्छा नहीं है। इस शरीर का आपको उपयोग करना है, इसलिए शरीर को आराम देना भी जरूरी है। और बाथरूम वाली बात में आपने फैसला लिया ना? आपको पता है कि थोड़ी देर रोक सकता हूं; मन का काम है बताना, सो उसने शरीर की जरूरत बताई, लेकिन आपने अपनी जरूरत ज्यादा रख दी कि ये रोज-रोज नहीं मिलेगा, आज ले लो। मन का काम है आपके शरीर की जरूरत को इंगित करना — अब दो जगह क्लिक कर रहा है, बाथरूम पे भी और 'इसे आराम दो' पे भी; कुछ देर और बैठोगे तो तीसरी जगह क्लिक करने लगेगा। वो आपका सहायक है। अगर वो काम ना करे, तो आपका पूरा शरीर फेल हो जाएगा; जिसको नहीं बताता, वे कोमा में चले जाते हैं, उन्हें पता नहीं चलता। अगर मन रुक जाए तो आपका ब्रेन डैमेज हो जाए; फिर आपकी जरूरत कौन बताएगा? इसलिए भैया, मन को मत रोको, मत परेशान करो।

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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11