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प्रश्नोत्तर P15-0181 · भाग 15

गुरुदेव, इतने असंख्य प्रश्न कहां से आते हैं — मन के द्वारा कि अपने आप?

बाहर से आपने लिया है। आपका एक भी प्रश्न नहीं है, आपके पास तो प्रश्न ही नहीं; लेकिन अभी आपके बन गए, क्योंकि इस प्रश्न को आपने अपना मान लिया — अब इसके उत्तर चाहिए। प्रश्न कहां से लिया? बाहर से; उत्तर कहां से चाहिए? बाहर से। प्रश्न भी इसी संसार से आए, उत्तर भी यहीं से आएंगे, क्योंकि आपने संसार से ही पंगे लिए। इसलिए आखिरी में प्रश्न भी नहीं रहेंगे, उत्तर भी नहीं रहेंगे, आप रहेंगे — वही है समाधि की स्थिति। एक समय ऐसा होगा कि ना आपके पास प्रश्न होंगे ना उत्तर; वही होती है समाधि।

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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11