प्रश्नोत्तर P15-0172 · भाग 15
भगवान, जब सत्संग सुनते हैं तब अपने आप में रहते हैं; जैसे ही सुनना बंद करते हैं, शरीर भाव में आ जाते हैं। क्या करें कि सदैव अपने आप में बने रहें? और एक तरफ खुशी, फिर रोना क्यों आता है?
इस सत्संग को व्यवहारिक जगत में, जब आप जी रही हैं, तब उतारिए। लोगों से बातचीत करते, उठते-बैठते, खाते-पीते, नाचते-गाते — हर वक्त इस सत्संग को अपने जीवन में उतारो, व्यवहारिकता में लाओ, बोलचाल में लाओ।
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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11