प्रश्नोत्तर P15-0164 · भाग 15
काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ की व्याख्या क्या है?
काम मतलब कोई भी कर्म — कोई भी काम करके अगर आपको परिणाम अपने तरीके से चाहिए, तब आप उसमें फंस जाते हो। कोई भी काम करो, परिणाम का इंतजार करो। क्रोध तब आता है जब आप किसी से कुछ करवाते हो और आपके तरीके से नहीं होता; अपने तरीके से करवाने का भाव छोड़ो — सबकी स्थिति-परिस्थिति अलग होती है, सामने वाला क्यों नहीं कर रहा, उसकी क्या स्थिति-परिस्थिति है, वो जांचिए। मद तब होता है जब आप कुछ बनना चाहते हो, किसी को नीचा दिखाना चाहते हो; तो किसी को ऊपर उठाने का भाव रखो, नीचा दिखाने का नहीं — मानवता यही कहती है। लोभ तब होता है जब आप अपने से ज्यादा किसी के पास कुछ देखते हो कि मेरे पास भी हो; देख लो आपकी सामर्थ्य है या नहीं, योग्यता है या नहीं, जरूरत है या नहीं — तो आपका लोभ हट जाएगा। मोह उससे होता है जिससे आपको अपने तरीके से मिलता है; तो अपने तरीके का त्याग करें, और लेने का भाव छोड़ के देने का भाव लें। तो काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह से आप अपने आप को निकाल पाएंगे।
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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11