आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P15-0125 · भाग 15

मेरे सद्गुरु जी, चिंतन पर समझाने की कृपा करें।

चिंतन उसी का होता है जैसा आपके जीवन में कर्म होता है। जैसे मान लीजिए भरी बाजार में आपको किसी ने अपमानित कर दिया, आप घर पे गए — अब चिंतन कहां का होगा? उस भरी बाजार का। आपको चिंतन करना नहीं पड़ेगा, वही चिंतन होगा। जीवन में जो जरूरी होगा वही चिंतन होगा: योग्यता से ज्यादा सम्मान हुआ तो उसका चिंतन होने लगेगा; भूख लगी तो उस पर, प्यास लगी तो उस पर। तो देखिए जीवन में आपको चाहिए क्या? जाना कहीं और है, पता कहीं और का पूछ रहे हैं; हमें खुद नहीं पता कि जाना कहां है, बस यूं ही चले जा रहे हैं। पहले फैसला कर लीजिए कि मुझे सच में क्या चाहिए। जब इस पर आप पूरी तरह फैसला कर लेंगे, तब उस पर आपका चिंतन होने लगेगा।

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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11