प्रश्नोत्तर P15-0123 · भाग 15
गुरुदेव, मैं अच्छे कर्म कर रहा हूं, सत्कर्म कर रहा हूं, फिर भी कोई मेरा शोषण कर रहा है और मुझे दिखाई दे रहा है — ऐसे समय में मैं क्या करूं?
मैं किसी पर हिंसा नहीं करूंगा, लेकिन जब कोई मुझ पर हिंसा करे तो मेरा कर्तव्य है अपनी आत्मरक्षा करना, और उस आत्मरक्षा में उसे सही तरीके से जवाब देना — वो हिंसा नहीं, आत्मरक्षा है। चींटी को भी अगर आप दबा दो तो पलट के काटती है; कोई उसे दोष देता है? तो अगर आपका कोई शोषण कर रहा है तो शोषण ना करने दीजिए — तुरंत उस व्यक्ति, उस जगह का त्याग करिए, या उस व्यक्ति को समझा दीजिए। और अगर शोषण करवा रहे हैं तो जरूर आप भी कहीं ना कहीं ज्यादा की उम्मीद में हैं, कुछ ना कुछ आपकी भी पूर्ति हो रही है; या कोई मजबूरी है, कोई डर है, या अबोध है, या कमजोर है, या कोई वासना है — कुछ तो बात है। क्योंकि जानवर तक शोषण नहीं करवाते: एक चूहा हाथ में पकड़ लीजिए, काटने लगता है; पक्षी पकड़िए, चोंच मारता है। यहां जितने भी जीव हैं, सब स्वतंत्र रहना चाहते हैं। शोषण तो आप तभी करवाओगे जब आपको कुछ मिलेगा।
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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11