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प्रश्नोत्तर P15-0117 · भाग 15

गुरुदेव, फिर कर्तव्य क्या है? जैसे परिवार का कर्तव्य — बेटी है, पत्नी है, माता-पिता हैं — हम कर्तव्य कैसे निभाएं?

कुछ जिम्मेदारियां आपको जन्म से मिल जाती हैं, कुछ जिम्मेदारियां आप लेते हो। आप उसे ईमानदारी से निभाइए ना, सीधी सी बात है। अपने कर्तव्य को पूरा करिए ईमानदार बनकर, और कर्तव्य पूरा करते हुए उन लोगों के लिए भी कुछ करिए जो समाज के लोग हैं, जिन्हें जरूरत है। आपके द्वारा जो भी कर्म इनकम के लिए हो रहे हैं, वो ईमानदारी से हों। उस ईमानदारी से जो आवक आए, उसमें परिवार का भरण-पोषण करते हुए कुछ सत्कर्म में भी खर्च करिए, जरूरतमंदों की सेवा करिए। अगर नहीं बचता है, तब इतना तो हक है आपको — हफ्ते में एक बार उपवास रख ही सकते हैं; दोनों टाइम नहीं तो एक टाइम का भोजन दान कर सकते हैं, चाहे किसी मनुष्य को चाहे किसी जीव को। बस यह आपको मुक्ति से मोक्ष तक ले जाएगा। ईमानदारी तपस्या है। करके आपने अपने आप को उलझा दिया है, अब निकलने के लिए करना पड़ेगा। तो कर्तव्य को निभाते हुए निकल जाइए। ईमानदारी मुक्ति है, बेईमानी बंधन। ईमानदारी अपना लो और सत्कर्म में अपने आप को लगा दो। आसान है ना निकलना?

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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11