प्रश्नोत्तर P15-0062 · भाग 15
अगर मैं यहाँ नहीं रुक सकता, तो क्या मैं आत्मज्ञान का अधिकारी नहीं हूँ?
अधिकारी तो आप हैं ही। वो आपको देखना है कि कमी कहाँ है। मुझमें हो तो मुझे बताओ, आप में है तो आप देखो; जा रहे हो तो बता के जाओ कि कमी कहाँ है। यहाँ हो तो मैं उस कमी को दूर करूँगा। मैं तो इतना खुला बोलता हूँ — ज्ञान में कमी हो, रहने में, भोजन में, कोई आपको तकलीफ दे रहा है, हम तो आपकी सहायता ही कर सकते हैं। इतने के बाद भी नहीं रुकते तो जाते वक्त इतना भी पूछ लेता हूँ कि घर तक का किराया है कि नहीं। इतना खुल के बोलने के बाद भी कोई बिना बताए जाता है, तो बहुत बड़ी कमी उसी में है।
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वीडियो: इतनी पूजा पाठ भक्ति करते हैं लेकिन दुख क्यों आते हैं ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #आध्यात्म · 2026-08-10