आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P15-0055 · भाग 15

मैं बहुत दुखी हूँ, सब कुछ घर-बार छोड़कर दूर पहाड़ों पर जाना चाहता हूँ और वहाँ भक्ति करना चाहता हूँ।

दुखी होके मत जाइए। कभी भी भक्ति करने या खोज करने जाइए तो अभाव-कुभाव में मत जाइए, स्वभाव में जाइए; अगर अभाव-कुभाव में गए तो जीवन भर भटकते रहोगे। पहले दुख दूर करिए और संपन्न होइए, तब घर से निकलिए, नहीं तो जीवन भर वो कमी आपका पीछा करेगी। मजबूरी में, लाचारी में मत छोड़िए; ज्ञान की खोज के लिए, स्वभाव में छोड़िए।

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वीडियो: इतनी पूजा पाठ भक्ति करते हैं लेकिन दुख क्यों आते हैं ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #आध्यात्म · 2026-08-10