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प्रश्नोत्तर P14-0173 · भाग 14

लोग कहते हैं हमें भगवान पर विश्वास है और जो भी हो रहा है भगवान की मर्जी से हो रहा है, फिर कुछ अनहोनी होती है तो रोते हैं — मीठा-मीठा गप, कड़वा-कड़वा थू, यह कैसी श्रद्धा है?

यही हाल तो है। भगवान की मर्जी से नहीं, भगवान के विधान से हो रहा है, सिस्टम से हो रहा है; उस विधान में जैसा आप काम करते हो वैसा होता है। जैसे आपने मोबाइल लिया, सिम कार्ड दे दिया गया, कोई कंपनी चला रही है; अब जैसा उपयोग करोगे वैसा परिणाम मिलेगा, उसकी जिम्मेदार कंपनी नहीं, उपभोक्ता है। फोन पर किसी को धमकी दोगे तो उठा लिए जाओगे; आप ये नहीं कह सकते कि मोबाइल के मालिक को पकड़ो। उस नंबर के पीछे आपकी आईडी है। इसलिए सदुपयोग करो। उसने संसार में एक सिस्टम बना दिया, इसमें जैसा कर्म करते हो वैसा परिणाम मिलता है।

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