प्रश्नोत्तर P14-0164 · भाग 14
श्री कृष्ण भगवान महल में रहते थे, रथों पर चलते थे, फिर भी योगेश्वर थे — तो क्या माया का त्याग करने से इंसान योगी होगा?
माया बेईमानी है। आप जरूरत को माया क्यों समझते हो? आप प्रभु की माया में परेशान नहीं हो, अपनी माया में परेशान हो। माया के कई रूप होते हैं, जैसे गेहूँ का रूप आटा, आटे का रूप रोटी, पर सबके पीछे गेहूँ है; वैसे हर रूप के पीछे बेईमानी है। प्रभु की माया में तो लोग आनंद में रहे; अपनी बनाई हुई माया में आप ग्रसित हो। इस संसार में आपने बेईमानी द्वारा अपने संसार का निर्माण किया है, इसलिए आपके संसार में अशांति है। ईमानदारी से होता तो आपके संसार का निर्माण ही नहीं हो पाता, आप मुक्त होते।
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