प्रश्नोत्तर P14-0137 · भाग 14
ये सब स्वप्न है, मन में संसार है, कुछ नहीं है — फिर भी हम उसी के जाल में फँसे हैं?
जब पक्का पता हो गया कि स्वप्न है, तो फिर आपका राग-द्वेष होना ही नहीं चाहिए; स्वप्न में क्या राग-द्वेष? राग-द्वेष है, इसका मतलब अभी ये सब शब्द से है, ज्ञान में नहीं हुआ है। ये कह देना बड़ा आसान है कि सब स्वप्न है। समझने के लिए यात्रा करनी पड़ेगी। कुछ नहीं है, लेकिन फिर भी "कुछ है" में यात्रा करके "कुछ नहीं" पहुँचना पड़ेगा, और यात्रा बुद्धिमानी से करनी पड़ेगी। धीरे-धीरे अपने आप को साधो, समझो, सँवारो और निकालो।
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वीडियो: कर्ता कौन है, अकर्ता कौन है ?| Who is the Doer ? Who is the Non-Doer ? #yogijikasatsang · 2026-05-18