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प्रश्नोत्तर P14-0133 · भाग 14

मूल्य और दाम में क्या फर्क है?

मूल्य मतलब वाजिब, सबके लिए एक समान, चाहे कोई भी आ जाए; उसमें अहम भाव नहीं है, वो स्वाभाविक है। कहते हैं ना यह मूल्यवान है, इसकी कोई कीमत नहीं, क्योंकि वो आपकी क्षमता के दायरे से बाहर है। और दाम बनाया हुआ होता है, उसमें बेईमानी होती है; बढ़ा-चढ़ा के बोल दिया कि यह दाम है, जैसा ग्राहक मिल जाए वैसा निकाल दो, हर आदमी के सामने अलग-अलग दाम। दाम आपने अहम भाव में निश्चित किया है। जैसे ही अहम भाव आता है, मूल्य दाम बन जाता है। सोच-समझ के, समझदारी से जीवन जियो, आवेश और जज़्बात में नहीं। अपने निकलने के लिए बातचीत करो — मैं इस भवसागर से कैसे निकलूँ। भव का मतलब जिसका आदि-अंत नहीं, आप उस जगह फँसे हो।

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