आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P14-0068 · भाग 14

गुरु जी, इंसान को जो भी अवस्था, सुख-दुख, जैसा घर मिलता है, वह सब पिछले कर्मों से होता है — क्या उसे बदला जा सकता है? कोई हर समय मानसिक पीड़ा में रहता हो तो?

सब आपके ही कर्मों से है, और बदल सकता है। कर्ता का अधिकार इसीलिए तो दिया गया है कि आप बदल सकते हो। चोट लगी तो मलहम लगा के उसे ठीक कर सकते हो, मलहम नहीं लगाओगे तो और भोगोगे। परमात्मा की ओर जाना — परमात्मा का पता ही नहीं, तो जाओगे कैसे? इसलिए सत्कर्म करो, ईमानदारी से जीवन जियो — बस यही रास्ता है। पिछले कर्मों की पीड़ा भी उसी से दूर होगी; जब हम कुछ करते हैं तो एक आगे बनता है और एक खत्म होता है। सत्संग भी अपने आप को सुधारना है; अब किस भाव से कर रहे हो वो देखना है — कर्म के पहले, कर्म के बाद एक भाव बनता है, उससे फल का निर्णय होता है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: इतने सरल ज्ञान को इतना रहस्यमय क्यों बना दिया गया | Why is Simple Truth made so Mysterious? in Hindi · 2026-03-06