आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P14-0049 · भाग 14

गुरु जी, मेरे जानने में दो-तीन आत्मिक ज्ञान वाले हैं, जिन्होंने आत्मज्ञान पाया और फिर लोगों को ज्ञान देने संसार में लौटे, लेकिन बाद में पछताए कि जिनके आगे सर पीट रहे थे वो कहीं तक पहुंचते नहीं — ऐसा क्यों?

व्यक्तिगत सर पीट रहे होंगे — यही तो गलती हो गई। व्यक्तिगत सर पीटोगे तो पछताओगे। आपका काम है काम करना। मैं पानी लेकर खड़ा हो गया, जिसको पीना है पिए, नहीं पीना मत पिए; मैं पानी लेकर वापस चल दूंगा, बात खत्म। ज्ञान जहां से आ रहा है वहीं जा रहा है, जैसे विद्युत। जिसको लेना होगा ले लेगा — महाभारत में एक ही ने लिया, अर्जुन; लेकिन आज तक गीता का लाभ लिया जा रहा है। आत्मज्ञानी के शब्द इधर-उधर नहीं होते, वह ऊर्जा ब्रह्मांड में घूमती रहती है। हम समझाने के लिए नहीं, समझने के लिए बोल रहे हैं; समझने की क्षमता दी नहीं जा सकती। कपार पटके, इसका मतलब उन्हें आत्मज्ञान नहीं हुआ था, आत्मज्ञान का भ्रम हो गया था। ये आप लोगों के लिए है — वर्तमान की पीढ़ी के लिए, आने वाली पीढ़ी के लिए; हो तो भी ठीक, नहीं हो तो भी ठीक।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: इतने सरल ज्ञान को इतना रहस्यमय क्यों बना दिया गया | Why is Simple Truth made so Mysterious? in Hindi · 2026-03-06