प्रश्नोत्तर P14-0043 · भाग 14
गुरु जी, कई बार मैं ऐसे आनंद में बैठा रहता हूं — ना कोई चमक, ना कोई विचार — पता नहीं ये कौन सी स्थिति है?
आपने किसी विधि, किसी ध्यान, योग या ज्ञान का सहारा लिया, तो वह अपने आप नहीं होती — फिर आप नकल कर रहे हो। शरीर की ताकत से ही विधि का उपयोग करते हैं, और हर पल ताकत कम हो रही है, इसलिए दोबारा नहीं जा पाते। जैसे रबड़ को खींचो, छोड़ोगे तो वहीं जाएगा। बाहर-अंदर के अनुभव में फंसो ही मत। आप फंस कहां रहे हो — दोबारा उसी को लाना चाहते हो, यह फंसना है। आपने निर्णय कर लिया कि वही आखिरी है — अहंकार निर्णय करता है; हो सकता है वह आपको भटकाने के लिए आ गया हो। निर्णय करने से हट जाओ। निर्णय करते-करते जब निर्णय करने के लिए कुछ नहीं बचेगा, निर्णय करता बचेगा — वही सत्य है। वो कभी-कभी होती है; हर पल चाहिए तो सीधा-सीधा निर्विकार हो जाओ, कभी-कभी चाहिए तो विधि द्वारा आओ-जाओ।
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वीडियो: जीवन में तप का महत्व / #योगीजी_का_सत्संग #जीवन #तप #महत्व #satsang · 2024-08-05