प्रश्नोत्तर P14-0037 · भाग 14
गुरु जी, कुटिया में केवल तप होगा तो सेवा नहीं हो पाएगी?
तप तो मेन है ना। अगर तप कर रहे हो तो सेवा लायक कहां रहे — शरीर सेवा लायक काम ही नहीं करेगा; बस एक बार बैठ जाओ। तप नहीं करोगे तो धीरे-धीरे पहुंचोगे — फिर परोपकार में लगे रहो, जरूरतमंद की सेवा करो तन से, धन से, ज्ञान से, भाव शुद्ध, निर्मल, पवित्र हो। अपने हक के लिए जोर-जबरदस्ती गलत नहीं है — मेरा हक बनता है ना कि मैं अपने घर का पता लगाऊं, कब तक इस जाल में फंसा रहूंगा, कब तक जन्म-मृत्यु के चक्कर काटता रहूंगा।
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वीडियो: जीवन में तप का महत्व / #योगीजी_का_सत्संग #जीवन #तप #महत्व #satsang · 2024-08-05