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प्रश्नोत्तर P13-0187 · भाग 13

गुरु जी, ज्यादातर हमारे रिश्ते "कुछ चाहिए" में ही होते हैं। ऐसा कौन सा रिश्ता है जिसमें कुछ नहीं चाहिए — एक गुरु-शिष्य का ही?

गुरु-शिष्य का रिश्ता देखिए — अगर पॉइंट को पकड़ेंगे तो गुरु को भी कुछ नहीं चाहिए, शिष्य को भी कुछ नहीं चाहिए; उसे "कुछ नहीं चाहिए" में आना है। तभी गुरु-शिष्य है, नहीं तो नहीं। एक "कुछ नहीं चाहिए" की स्थिति में है, और एक "कुछ नहीं चाहिए" में आना चाहता है — दोनों को एक दूसरे से कुछ नहीं चाहिए, तभी तो वहां आनंद रहता है। बाकी जितने भी रिश्ते हैं, सबमें हमें कुछ ना कुछ चाहिए — पिता हो, माता हो, भाई हो, बहन हो, कोई भी हो। और गुरु ऐसा है कि अब जा सकते हो, रह सकते हो; बाकी रिश्तों में नहीं छोड़ेंगे तुम्हें। गुरु के पास चाहे जब आओ, चाहे जब जाओ — बस वो इतना कहता है, अपना ख्याल रखना। हां, खंभे के अंदर रहे तो जैसा मैं कहूंगा वैसा जीना पड़ेगा, सिस्टम में। और एक बात — अगर आप जा रहे हो तो आने लायक छोड़ना।

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वीडियो: प्रेम और आनंद में कैसे रहें ? - aadhyatmik pratyaksh gyan Yogi #livesatsang · 2025-04-20