प्रश्नोत्तर P13-0181 · भाग 13
गुरु जी, प्रेम और आनंद में हर पल कैसे जिएं? आजकल प्रेम और आनंद शब्द का बहुत उपयोग होता है, इन्हें बहुत विकृत कर दिया है। सत्संग सुनते-सुनते पता चल गया कि प्रेम और आनंद किसमें होता है, लेकिन हर क्षण उनमें कैसे जी सकते हैं?
शुरुआत में तो बोल दिया गया कि "कुछ नहीं चाहिए" में आ जाओ, लेकिन थोड़ा इसे पलटते हैं। जब आप किसी के लिए कुछ करते हो और आपको उसके बदले में कुछ नहीं चाहिए, तो आप प्रेम में उतर जाते हो, और जब प्रेम में उतर जाते हो तो आप आनंद में उतर जाते हो। जब आप किसी के लिए कुछ करते हो और आपको कुछ नहीं चाहिए, उस समय आप होते हो — उस समय आप प्रेम में होते हो, और जब आप होते हो तो वहां आनंद होता है, क्योंकि आप में आनंद है। लोग क्या कहते हैं वो छोड़ दीजिए; आप कैसे जीते हो, किस भाव से जीते हो, आप किस स्थिति में खड़े हो, वो देख लीजिए। प्रेम दर्शाने के लिए कोई चाहिए — प्रेम अकेले में पैदा नहीं होगा; आनंद आप में पैदा होगा, लेकिन जब आप प्रेम में उतरोगे तभी आनंद पैदा होगा। प्रेम में जब आप उतरेंगे, तब आप होंगे, और आपको सामने वाले से कुछ नहीं चाहिए — आप सामने वाले के लिए कुछ कर रहे हैं और आपको कुछ नहीं चाहिए। दो हो गए, पर जब कुछ नहीं चाहिए तो दो होते हुए भी दो नहीं हैं। जब कुछ नहीं चाहिए तो द्वैत कहां हुआ? एक खड़ा है, लेकिन एक को कुछ नहीं चाहिए, तो एक ही है। कुछ बातें बस समझी जा सकती हैं, समझाई नहीं जा सकतीं, क्योंकि शब्दों के साथ भावनाएं भी होती हैं। अगर आप शब्द को पकड़े और भावनाओं को नहीं पकड़े, तो आप नहीं समझ पाओगे।
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वीडियो: प्रेम और आनंद में कैसे रहें ? - aadhyatmik pratyaksh gyan Yogi #livesatsang · 2025-04-20